Monday, 8 October 2018

कसक


ये कौन सी सय है ,मेरे सीने में
जो न जलती है ,न ही बुझती है
धुएं से घुटती चली जा रही है, जिन्दगी बस \\

लालच बुरी बला :-

एक समय की बात है एक शेर बहुत दिनों से भूखा -प्यासा जंगल में भटक रहा था | बहुत दिनों से उसे कुछ भी खाने -पीने  को नही  मिला था ,शिकार की तलाश में भटकता हुआ वह अचानक एक दलदल में फंस गया | बहुत प्रयास के बाद भी जब वह बाहर नहीं निकल पाया तब निराश होकर कुछ उपाय सोचने लगा | तभी उसी रस्ते एक लालची पंडित को गुजरते हुए उसने देखा | शेर ने उससे कहा  की यदि वह उसे उस दलदल से बाहर निकल देगा तो शेर अपने हाथ में पहने हुए सोने के कड़े को  उपहार स्वरुप उसे देगा ,ऐसा कहते हुए शेर ने उसे अपने हाथ में पहने कड़े को दिखाया वह सचमुच ही एक सोने का चमचमाता हुआ कंगन था | उसे देखकर पंडित के मुंह में पानी आ गया वह किसी भी तरह वह कंगन प्राप्त करना चाहता था | अतः उसने शेर को दलदल से बाहर निकलने का निश्चय किया तथा ज्योही उसने शेर को बाहर निकाला शेर उस पर टूट पड़ा इस तरह अपने लालच की वजह से पंडित को अपनी जान से हाथ धोना पड़ा |

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