Friday, 7 July 2017


जो लोग जानते नहीं है खुद को बेहतर 
वो मुझको कह रहे है थोड़ा आदमी ख़राब हूँ
 
कुछ दिप बुझ चुके है, कुछ टिमटिमा रहे है
कुछ राह तक रहे है कोई उन्हे बचा ले !
प्रिय स्नेह निमंत्रण ठुकराकर, 
 संबंध क्यो चकनाचूर किया
उर अंतर से जो जुड़ी  डोर
निर्ममता  से क्यो तोड़ दिया |

Thursday, 6 July 2017

पिया मत जा अबे परदेश (भोजपुरी )


जे तू छोड़ी जइब घरवा-दुआर
ते सगरो हेराई जाई हो
पिया तोहरे से घर -संसार
ते मनवा पिराई जाई हो
उहाँ कटी तोहर एकरे जवानी
इहाँ होइहे  जिआन मोर जवानी
पिया कर जनी ऐइसन नादानी
ते सगरो हेराई जाई हो !
चली जईब ऐइसे नेहिया छोड़ाई
जहिये सगरो सवतियाँ जुड़ाई
मारी ताना रहिए हमके सुनाई
ते जिनगी नसाई जाई  हो
रहब एईसे जो दूर मोरे सजना
कईसे गोदिया खेली मोरे ललना
लाल बिना रही जिनगी विरान
ते जिनगी नसाई  जाई हो
जे तू छोड़ी जइब घरवा-दुआर
ते सगरो हेराई जाई हो ||

  

है ! वक्त सुधर जाओ



औरो के टुकड़ो पर ,पलने वालो सुन लो
बम ,बारुधो की खेती करने वालो सुन लो !
है वक्त सम्हल जाओ वरना मिट जाओगे
खुदको कितने ढाका में टुटा पाओगे
खेलोगे कब तक खुनी खेल बताओ तुम
है वक्त सम्हल जाने का वापस जाओ तुम
दुश्मन कहते हो हमको शर्म न आती तुमको
इतिहास गवाह ना उठी हिन्द की सेना खुद से
कब तक अपने आवामो को चकमा दोगो
हम विश्व धरोहर है कब तक पंगा लोगे
चीनी है हमदम देख तरस आता है मुझको
हिंदी -चीनी अंजाम नही दिखता क्या तुमको
है वक्त सम्हल जाने का अब भी आखें खोलो
मानवता पर जो किया घात अब तक जो धोलो ||

तुमसे रुखसत से पहले कुछ निशाँ  मै  छोड़ जाऊंगा
अगर दिल से पुकारो ख्वाब में मै लौट आउँगा |

सुलगता कश्मीर

शोर्णित है रक्तो से फिर वसुधा की छाती
कितने दिन बीते जाने कितने है बाकि
लुट रहा आज फिर से नंदन वन की थाती
जल रही जिहादी नफरत में कश्मीर घाटी |
इबादतगाह भी बन रह गये है अब शियासतदा
जहाँ तेरी इबादत हो जरा सा फासला रखना |
न जाने गिर पड़े कब ,तेरे ही उपर इबादतगाह
जो चाहे चोट से बचना ,तो थोड़ा फासला रखना |
ये ठेकेदार तेरे नाम पर फिरते जो गलियों में
तू रहकर साथ इनके रूह में भी फासला रखना |

जाते हो नजर फेर कर जाओ मगर
सुन लो ,
हम भी दीदारे आरजू तुझको
न खडें थे .
कराह दिल में अनायास उठी है नही विवेक ,
जो  अभी अजनबी सा गुजरा है
कभी बेहद करीब था |
सुबह ,दोपहर ,शाम फिर रात हुई है ,
आज गाँव में सारा दिन हल्की बरसात हुयी है |
दोनोँ थे खामोश फिर भी बात हुई है ,
खयालो में ही आये थे कहा मुलाकात हुई है |