Friday, 28 December 2018

अनोखे अटल

"अटल " एक ऐसा व्यक्तित्व जिनकी लोकप्रियता किसी
 खास वर्ग या पक्ष तक सीमित नही रही ।भारतीय राजनीति के उन विरले व्यक्तियो मे से एक जिनका विपक्ष तो रहा परन्तु विरोधी नही वह राजनीति के अजातशत्रु रहे। उन्होने राजनीति मे जिस गरिमा व शुचिता का प्रतिमान स्थापित किया वर्तमान परिदृश्य से वह ओझल है । पक्ष-विपक्ष के वैचारिक मतभेद इस कदर विद्धेष मे परिवर्तित हो चुके है कि पद की गरिमा व भाषाई मर्यादा को आये दिन तार-तार कर रहे है । आपसी समन्वय तथा प्रतिकुल वैचारिक समरसता जैसे बस कहने की बात रह गयी हो एक दुसरे का सम्मान एवं बौधिक स्वतंत्रता मिटती सी जा रही है । सत्ता लोभ मे अंधी राजनीतिक पार्टीयो के नेता एक दुसरे पर व्यक्तिगत घटिया आरोप प्रत्यारोप लगाने मे तनिक भी संकोच नही कर रहे है । लोकतंत्र का स्वरूप संकुचित होता जा रहा है ऐसे वक्त मे उस गुजरे दौर की धुधँली होती याद और भी ताजी हो उठती जिसमे अटल जैसे महान व्यक्तित्व ने न सिर्फ सत्ता मे रहकर अपितु विपक्ष मे भी रहकर उस अनोखे  राजनीतिक मर्यादा को स्थापित किया जिसकी अपेक्षा समाज व जनता को सदैव अपने राज नेताओ से बनी रहेगी  ।।