Saturday, 30 June 2018

हाँ मैंने एक और जमाना देखा है
सावन के रिमझिम बूंदो संग ताल मिलाती
बलखाती ,इठलाती ,कजरी ,ठुमरी  को देखा है
कच्ची नर्म सड़के ,बैलगाड़ी और टमटम
खलिहान ,चौपाल  को गुजरते देखा है
दादी और नानी के गोद से लिपट कर
किस्से कहांनिया सुनते ....
खिलखिलाते बचपन का दौर गुजरते देखा है
हाँ मैंने एक और जमाना देखा है \\
जब भी देखो मुझे तो, मुस्कुराया करो
खीझ कर यूँ न नजरे चुराया  करो
कह भी दो जो हो दिल में तुम्हारे
ए सनम यूँ न बाते बनाया करो
गर हो उलफ़त  मिला भी करो
दूर से हाथ बस न हिलाया करो
रंजो -गम जिंदगी में अगर हैं कोई
अजनबी की तरह न छुपाया करो \\
 दोनों के जुम्बिश लबो के दरम्यान
 दिल के जो असरार थे बेकल  रहे
कह सके न कुछ रहे खामोश  दोनों
बात जो कह देनी थी वो रह गयी  \\
दिदार  जबसे  हुआ है उनका
दिल कुछ  खोया -खोया सा रहता है
ऐसे पहले तो कभी ना थे हम.....
यार कहते मुझे इश्क हो गया  शायद !!



देखा जो हुस्न -ए -बहार  देखता रह गया
नब्ज़ जम सी गयी ,साँसे सहम गयी
अब तो हर वक्त बस खोया- खोया सा रहता  हूं
आजकल हो गया है क्या मुझको ....
ऐसा लगता है मुझे इश्क हो गया शायद  !!