Sunday, 30 September 2018

खफा आजकल है वो क्या हम बताये
मिले गर नजर तो हेल दिल सुनाये //
तमन्ना न थी रूठ जायेंगे ऐसे
मिले ख्वाब में ही उन्हें हम मनाये //
आती नहीं नींद रातो में हमको
जो सपने  में आये तो नींद आ जाये //
बहुत ही दूरह है प्रतीक्षा की घड़िया
मिटाये न मिटे जुदाई की लड़ियां //
मिले आके मुझसे जो चैन आ जाये
खफा आजकल है वो क्या हम बताये // 
वो हर दफा खंजर चलाये ,हम हर दफा सहते रहे
कुछ इस तरह हमने निभाई ,बेवफ़ाई यार की //

वो बारहा लूटते रहे ,हम हर दफा लुटते रहे 
कुछ इस कदर बीती जवानी सबर करते खार की //

हम जोड़ कर भी खुश न थे ,वो तोड़ कर भी खुश हुए 
कुछ इस तरह टूटी पुरानी सिलसिला जज्बात की //