हाँ मैंने एक और जमाना देखा है
सावन के रिमझिम बूंदो संग ताल मिलाती
बलखाती ,इठलाती ,कजरी ,ठुमरी को देखा है
कच्ची नर्म सड़के ,बैलगाड़ी और टमटम
खलिहान ,चौपाल को गुजरते देखा है
दादी और नानी के गोद से लिपट कर
किस्से कहांनिया सुनते ....
खिलखिलाते बचपन का दौर गुजरते देखा है
हाँ मैंने एक और जमाना देखा है \\
सावन के रिमझिम बूंदो संग ताल मिलाती
बलखाती ,इठलाती ,कजरी ,ठुमरी को देखा है
कच्ची नर्म सड़के ,बैलगाड़ी और टमटम
खलिहान ,चौपाल को गुजरते देखा है
दादी और नानी के गोद से लिपट कर
किस्से कहांनिया सुनते ....
खिलखिलाते बचपन का दौर गुजरते देखा है
हाँ मैंने एक और जमाना देखा है \\
No comments:
Post a Comment