Thursday, 6 July 2017

है ! वक्त सुधर जाओ



औरो के टुकड़ो पर ,पलने वालो सुन लो
बम ,बारुधो की खेती करने वालो सुन लो !
है वक्त सम्हल जाओ वरना मिट जाओगे
खुदको कितने ढाका में टुटा पाओगे
खेलोगे कब तक खुनी खेल बताओ तुम
है वक्त सम्हल जाने का वापस जाओ तुम
दुश्मन कहते हो हमको शर्म न आती तुमको
इतिहास गवाह ना उठी हिन्द की सेना खुद से
कब तक अपने आवामो को चकमा दोगो
हम विश्व धरोहर है कब तक पंगा लोगे
चीनी है हमदम देख तरस आता है मुझको
हिंदी -चीनी अंजाम नही दिखता क्या तुमको
है वक्त सम्हल जाने का अब भी आखें खोलो
मानवता पर जो किया घात अब तक जो धोलो ||

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