महावारी कोई समस्या नहीं...
बदलते दौर के साथ बहुत कुछ बदल जाता है।लेकिन हैरानी की बात है कि 21वीं शताब्दी में भी कुछ चीजें ऐसी हैं।जो एक समस्या बनकर हमारे सामने खड़ी हैं।जिनके बारे में बातें तो बहुत होती हैं परंतु सार्थक चर्चा नाम मात्र की।जबकि आवश्यकता इस बात की है कि हम उनके प्रति मुखर होकर सोचें और बात करें।जिससे कि उन चीजों के प्रति समाज का नजरिया बदल सके।यह इसलिए और ज्यादा आवश्यक है क्योंकि यदि ऐसा नहीं किया गया तो समय के साथ-साथ ये समस्याएँ विकराल रूप धारण करती जाती हैं।जिनसे कुछ होता है तो सिर्फ नुकसान ही।इसके सिवा और कुछ नहीं।
आज का समय वैज्ञानिक दृष्टिकोण का समय है।प्रत्येक घटना को तर्क और साक्ष्य के कसौटी पर कसा जाता है और तब जाकर उसके प्रति कोई निर्णय लिया जाता है।लेकिन दुःख की बात है कि लड़कियों और महिलाओं में होने प्राकृतिक क्रिया "मासिक धर्म" को संदेह और संशय के नजर से देखा जाता है।खासकर ऐसी बातें गाँवों में व्यापक स्तर पर सुनने को मिलती हैं।उचित जानकारी के अभाव में गाँवों में माहवारी को गलत तरीके से प्रस्तुत किया जाता है।जो कि नितांत गलत और अन्यायपूर्ण है।और तो और इसके लिए पुरुषों से ज्यादा जिम्मेदार एक प्रकार से महिलाएँ ही हैं।अधिकांश महिलाएँ ही इसे एक समस्या और विपत्ति के रूप में प्रस्तुत करती हैं।
जबकि माहवारी ऐसा कुछ भी नहीं है।यह तो एक सामान्य सा मासिक क्रिया है।जो प्रथम बार 10-12 वर्ष के उम्र वाली लड़कियों में शुरू होता है और 40-42 वर्ष तक के उम्र तक जारी रहता है।मानवीय जगत में इसका इतना महत्व है कि यदि यह न हो तो मानव जाति का विकास ही अवरुद्ध हो जाए।यदि मान लिया जाए कि किसी लड़की को पीरियड्स नहीं होता है तो क्या होगा तो उसका सामान्य-सा उत्तर है कि वो लड़की कभी भी माँ नहीं बन सकती है?अर्थात इंसानों की पैदाइश ही बंद हो जाएगी।समूची दुनिया इंसान विहीन हो जाएगी।इसलिए यह मानकर चलना होगा कि यदि हमें अपना अस्तित्व बनाए रखना है तो लड़कियों को होने वाले मासिक धर्म को स्वीकार्यता देनी ही पड़ेगी।
एक कहावत है कि "जाके पैर न फटी बेवाई,सो का जाने पीड़ पराई।"ठीक इसी प्रकार का हाल पुरुषों का है।इन्हें क्या पता कि जब पीरियड्स आता है तो लड़कियों को कितनी तकलीफ उठानी पड़ती है और वो भी प्रत्येक महीने।वैसे तो अधिकतर पीरियड्स 3 से 5 दिन तक रहता है।हालांकि 2 से 7 दिन तक की अवधि को सामान्य माना जाता है।माहवारी महीने में एक बार होता है,सामान्यतः 28 से 32 दिनों में एक बार।इस प्रकार हम देखते हैं कि प्रत्येक लड़की को पीरियड्स के दौरान असामान्य दर्द और तकलीफ से गुजरना पड़ता है।उनके शरीर से काफी मात्रा में खून का स्राव हो जाता है।जिससे उन्हें शारिरिक कष्ट और कमजोरी भी होता है।
लेकिन उनको शायद इस बात से जितना दुख और ग्लानि नहीं होती होगी जितनी शायद उनको पीरियड्स के दौरान गलत नजर से देखने से होती है।यहाँ तक कि उनको अपने ही लोग पराए समझने लगते हैं।कहीं-कहीं तो उनसे अछूतकन्या सरीखे व्यवहार किया जाता है।जिसका बुरा और घातक परिणाम लड़कियों और महिलाओं के स्वास्थ्य पर पड़ता है।इससे वे डरती हैं और इसके प्रति लापरवाह होती जाती हैं।विश्व स्वास्थ्य संगठन के एक रिपोर्ट के अनुसार गर्भाशय के मुँह के कैंसर के कुल मामलों में से 27% अकेले भारत में होते हैं और इसकी एक बड़ी वजह माहवारी के दौरान साफ-सफाई की कमी होती है।
अब समय आ गया है कि एक प्राकृतिक घटना को सहर्ष स्वीकार किया जाए और लोगों को इसके प्रति जागरूक किया जाए।जैसा कि अभी पड़ोसी देश नेपाल में देखने को मिला है।वहाँ पर भी माहवारी को लेकर तमाम भ्रांतियाँ मौजूद थीं।नेपाल में मासिक धर्म वाली स्त्रियों को अपवित्र समझा जाता था।जिसे "छौपद्री प्रथा" के नाम से जाना जाता था।माहवारी के दौरान नेपाल के कुछ इलाकों में लड़कियों को घर से दूर एक झोपड़ी में रहने के लिए बाध्य किया जाता था।जो कि मानवीय मूल्यों पर किसी अत्याचार से कम नहीं था।जिससे निजात पाने के नेपाल सरकार को कानून बनाना पड़ा।जिसके अंतर्गत अब छौपद्री प्रथा गैरकानूनी घोषित की जा चुकी है और यदि कोई इसको जबड़न थोपता है तो उसके लिए 3 महीने की कारावास या 2000 रुपये दंड या दोनों आरोपित किया जा सकता है।
ठीक इसी प्रकार के एक कठोर कानून की आवश्यकता भारत में भी महसूस की जा रही है।जिससे कि पीरियड्स वाली लड़कियों को कोई बाहरी मानसिक और शारिरिक तकलीफ न हो।और साथ ही साथ जैसे पोलियो अभियान चलाया गया था,उसी प्रकार इसके प्रति भी एक जागरूकता अभियान चलाने की जरूरत है।जिससे कि लोगों की सोच बदले और महिलाएँ भी अपने स्वास्थ्य के प्रति भिज्ञ हों।क्योंकि पीरियड्स के दौरान उनके इंफेक्शन और बीमार होने की संभावना ज्यादा रहती है।जिसके कारण उनको असहनीय पीड़ा का सामना करना पड़ता है और कभी-कभी इस इंफेक्शन के कारण उनकी जान भी चली जाती है।
great shukla ji
ReplyDeletegood job
ReplyDeleteRight👍
ReplyDeleteसार्थक
ReplyDeletewo to hai
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