Friday, 10 May 2019

मिलन

हमारा मिलन होगा,
पर कब?
तब,
जब,
श्मशान और संसार में,
कोई भेद न रहेगा।
हमारा मिलन होगा,
पर कब?
तब,
जब,
सभ्यताएं राख हो जायेंगी।
हमारा मिलन होगा,
पर कब?
तब,
जब,
अतृप्तों को तृप्ति मिल जायेगी।
हमारा मिलन होगा,
पर कब?
तब,
जब,
काल कराल भी पराजित हो जायेंगे।
हमारा मिलन होगा,
पर कब?
तब,
जब,
साधकों की साधनाएं देवत्व को भी ललकारेंगी।
हमारा मिलन होगा,
पर कब?
तब,
जब,
मृत्यु अपने स्वामी का भी वरण करेगी।
हमारा मिलन होगा,
पर कब?
तब,
जब,
महानायकों की अस्थियों को कुत्ते चबायेंगे।
हमारा मिलन होगा,
पर कब?
तब,
जब,
हमारा सूर्य स्याह कृष्ण-विवर में परिवर्तित हो जायेगा।
हमारा मिलन होगा,
पर कब?
तब,
जब,
संवाद के लिए भाषाओं की जरूरत न होगी।
हमारा मिलन होगा,
पर कब?
तब,
जब,
कल्पना और यथार्थ सम्मिश्रित हो जायेंगे।
हमारा मिलन होगा,
पर कब?
तब,
जब,
वर्तमान किंवदंतियों से भर जायेगा।
हमारा मिलन होगा,
पर कब?
तब,
जब,
भूत का अस्तित्व ही मिट जायेगा।
हमारा मिलन होगा,
पर कब?
तब,
जब,
यह असीम ब्रह्मांड घनीभूत हिरण्यगर्भ में तब्दील हो जायेगा।
हमारा मिलन होगा,
पर कब?
तब,
जब,
नश्वरों की समस्त इच्छायें फलीभूत हो जायेंगी।
हमारा मिलन होगा,
पर कब?
तब,
जब,
चिरपुरातन और चिरनवीन मे ऐक्य स्थापित हो जायेगा।
हमारा मिलन होगा,
पर कब?
तब,
जब,
अगणित और अनंत,नगण्य हो जायेंगे।
हमारा मिलन होगा,
पर कब?
तब,
जब,
इतिहास एक अधभूली-सी कहानी बन कर रह जायेगा।
हमारा मिलन होगा,
पर कब?
तब,
जब,
युगों और क्षणों के बीच का अंतराल समाप्त हो जायेगा।
हमारा मिलन होगा,
पर कब?
तब,
जब,
प्रेम भी नैराश्य को ग्रहण कर लेगा।
तब,
तब,
कहीं जा के,
हम मिलेंगे।
शायद!
क्या
सच में मिलेंगे?
~दिव्य प्रकाश सिंह 'अवधुत'
 काशी हिन्दू विश्वविद्यालय बनारस

No comments:

Post a Comment